A Joycean Blasphemy

I wrote:

I am buried, right now. Under deadlines.

That was just a bit Joycean.

This one is more Joycean:

I am buried. Right. Now. And-er dead. Lines.

(Actually, there is also a touch of Arundhati Roy here.)

I can’t help imagining how a sub-ed would react to this: coming from a nobody. Not even a native speaker of the Global Language.

Blasphemy!

(The rant and the rave are yet to follow. They will come. I promise.)

(प्राण जाएं पर वचन न जाए)

Author: anileklavya

मैं सांगणिक भाषाविज्ञान (Computational Linguistics) में एक शोधकर्ता हूँ। इसके अलावा मैं पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, और कुछ लिखने की कोशिश भी करता हूँ। हाल ही मैं मैने ज़ेडनेट का हिन्दी संस्करण (http://www.zmag.org/hindi) भी शुरू किया है। एक छोटी सी शुरुआत है। उम्मीद करता हूँ और लोग भी इसमें भाग लेंगे और ज़ेडनेट/ज़ेडमैग के सर्वोत्तम लेखों का हिन्दी (जो कि अपने दूसरे रूप उर्दू के साथ करोड़ों लोगों की भाषा है) में अनुवाद किया जा सकेगा।

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