मौत

(कविता – हैरॉल्ड पिंटर)

लाश कहाँ मिली थी?
लाश किसको मिली थी?
लाश जब मिली तब क्या वह मृत थी?
लाश मिली कैसे थी?

लाश थी किसकी?

पिता या भाई कौन था या बेटी कौन थी
या चाचा या मामा या बेटा कौन था या माँ या बहन कौन थी
उस मृत और लावारिस शरीर के?

लावारिस होने से पहले क्या शरीर मृत था?
क्या लाश लावारिस ही थी?
किसने उसे वहाँ छोड़ा था?

क्या मृत शरीर नंगा था या उस पर यात्रा की तैयारी में पहने गए कपड़े थे?

आपने किस आधार पर निर्णय किया कि शरीर मर चुका था?
क्या आपने निर्णय किया था कि शरीर मर चुका है?
आप लाश को कितना क़रीब से जानते थे?
आपको कैसे पता चला कि शरीर मर चुका है?

क्या आपने लाश को धोया था
क्या आपने उसकी आँखें बंद की थीं
क्या आपने उसे दफ़नाया था
क्या आपने उसे वहाँ छोड़ा था
क्या आपने लाश को चूमा था

अनुवादक: अनिल एकलव्य
अनुवाद तारीख: 11 अप्रैल, 2007

शहीदों को नमन

शहीद दिवस पर हम करते हैं
तमाम शहीदों को हार्दिक नमन

बेशक बहुत शुभ रहा है
हमारे लिए जितना उनका जीवन
उतना ही उनका असमय मरण

तो आइए करते हैं इस दिन यह प्रण
भविष्य के हम जैसे लोगों के लिए इसी क्षण
निभाते रहेंगे हम दुनिया की प्राचीन रीत
बनाते रहेंगे हम नये-नये शहीद

 

[2009]

महाशक्ति-गान

रम-पपम रम-पपम
रम पपम-पपम
हम तो हैं महाशक्ति
जो चाहे करेंगे हम

घर में घुसेंगे तुम्हारे
सब तोड़-फोड़ डालेंगे
जो भी पड़ेगा बीच में
उसकी टांग तोड़ डालेंगे

रम-पपम रम-पपम
जो चाहे करेंगे हम

दो-चार जड़ेंगे तुम्हारे
बाहें डालेंगे मरोड़
हाथ-पैर जो फेंकोगे तो
हरजाना भरोगे करोड़

रम-पपम रम-पपम
जो चाहे करेंगे हम

मकान जो तुम्हारा टूट चुकेगा
उसे फिर से बनवाएंगे हम
खर्चा तो खैर तुम ही दोगे
बस मुनाफ़ा उठाएंगे हम

रम-पपम रम-पपम
जो चाहे करेंगे हम

चूं-चपड़ जो अगर करी तो
जोड़ देंगे लादेन के साथ
जंग छेड़ेंगे तुम्हारे खिलाफ़
दाँत दे देंगे तुम्हारे हाथ

रम-पपम रम-पपम
रम पपम-पपम
हम तो हैं महाशक्ति
जो चाहे करेंगे हम

नई-नई फ़िल्में बनाएंगे
विलन होगे तुम, हीरो होंगे हम
फ़िल्में जीतेंगी ढेर-से इनाम
कला के पारखी भी करेंगे सलाम

रम-पपम रम-पपम
जो चाहे करेंगे हम

ज्ञान हो, विज्ञान हो, अज्ञान हो
इतिहास हो, परिहास हो, बकवास हो
नाम तुम्हारा मिटा डालेंगे
तुम को तुम्हीं से लड़ा डालेंगे

रम-पपम रम-पपम
जो चाहे करेंगे हम

मार खाओगे तुम, मुद्दई होंगे हम
खून बहेगा तुम्हारा, दावा ठोकेंगे हम
तकलीफ़ होगी तुम्हें, आँसू बहाएंगे हम
हमीं होंगे पुलिस, जज भी होंगे हम

रम-पपम रम-पपम
रम पपम-पपम
हम तो हैं महाशक्ति
जो चाहे करेंगे हम

सभ्यता का पाठ पढ़ाएंगे हम
सलाम ठोकना सिखाएंगे हम
ताकत का आदर करवाएंगे हम
नाक फर्श पे रगड़वाएंगे हम

रम-पपम रम-पपम
जो चाहे करेंगे हम

गफ़लत में पर मत ना रहना
तुमको ना करने देंगे हम

रम-पपम रम-पपम
रम पपम-पपम

 

[2009]

देव-दास

हम तो पहले ही बता चुके थे तुम्हें

चाँदी के चम्मच की चम-चम
पारो के कंगन की खन-खन
चंद्रमुखी के पायल की छन-छन
पाने का नहीं है तुम में दम-खम

तुम तो देवदास भी नहीं हो
तुम देव-दास भी जो नहीं हो

देव तुम हो नहीं सकते
दास तुम बन नहीं सकते

हम तो पहले ही बता चुके थे तुम्हें

 

[2009]

बरकत है भूख की

करतब के बर्तन में बरकत है भूख की
फिर भी ना खाए तो हरकत है मूर्ख की

करता है बरगद साल-दर-साल कदमताल
ये क़वायद है लेने को मरघट के हाल-चाल

सरपट चले जाने की यहाँ पर है परिपाटी
फ़ुरसत नहीं सोचें कितनी हरी थी ये घाटी

गफ़लत का मफ़लर रहता है गर्म हर दम
शर्म के लिहाफ़ के ना होने का क्यों हो ग़म

पनघट पर बिल्कुल भी नहीं मिलता है पानी
पानी तो पनघट से लाती थी नानी की नानी

खुदा का ये मुद्दा क्या नहीं लगता है बेहूदा
तदबीर और तकदीर की तस्वीर जो है बेहूदा

सवाल नहीं काफ़ी और जवाब भी नहीं काफ़ी
सवाल-जवाब जोड़ी में खरीद लाओ तो माफ़ी

दिल हलाक़, दिमाग़ क़त्ल, बदन से नहीं है सम
पल भर को लेने दो दम, साँस अब बची है कम

 

[2009]

Name Dropping

Ignorance has a blessing
And it’s called Name Dropping

When you meet people
Who know less than you
You can just drop Names

And to take care of those
Who know much more
You can drop Name Dropping

 

[2009]

मौत की उम्र तो हो चली है

(कविता – हैरॉल्ड पिंटर)

मौत की उम्र तो हो चली है
पर उसके पंजे में अब भी दम है

पर मौत आपको निहत्था कर देती है
अपने पारदर्शी प्रकाश से

और वो इतनी चतुर है
कि आपको पता भी न चले

वो कहाँ आपके इंतज़ार में है
आपकी इच्छाशक्ति को मोह लेने को
और आपको निर्वस्त्र कर देने को
जब आप सज रहे हों क़त्ल करने को

पर मौत आपको मौका देती है
अपनी घड़ियाँ जमा लेने का

जब वो चूस रही हो रस
आपके सुंदर फूलों का

अनुवादक : अनिल एकलव्य

चोर शोर मोर

चोर! चोर! चोर!
धर लिया
पकड़ लिया
फाँस लिया
अधम है घनघोर!

चोर! चोर! चोर!
ये कौन मचा रहा शोर
बहुत कर रहा बोर
यहाँ तो नाच रहा है
मोर! मोर! मोर!

हजार बार दोहराओ
लाख बार दोहराओ
यहाँ तो नाच रहा है
मोर! मोर! मोर!

चोर! चोर! चोर!
धर लिया
पकड़ लिया
फाँस लिया
अधम है घनघोर!

हजार बार दोहराओ
लाख बार दोहराओ
यहाँ तो नाच रहा है
मोर! मोर! मोर!

चोर! चोर! चोर!
फाँस लिया
अधम है घनघोर!
यहाँ तो नाच रहा है
मोर! मोर! मोर!

 

[2009]

खूँ-ए-हस्बे-मामूल

 

खूँ-ए-हस्बे-मामूल (Bloody Normalcy)

 

Bloody Normalcy

 

हैदराबाद, जनवरी, 2009

Hyderabad, January, 2009

 

तुम और मैं

कुछ मामलों में
     मैं तुम्हारे ही जैसा हूँ
और कुछ अन्य में
     नहीं भी हूँ

जितना तुम जैसा हूँ
     उतना होने में
मुझे कोई शर्म भी नहीं है

लेकिन मैं
     पूरी तरह
     तुम्हारे जैसा
नहीं होना चाहता

क्योंकि तुम
     हो चुके हो
और मेरा होना
     अभी बाकी है

 

[2005]