गुलाबी कपड़ा

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सुना है
आर्यावर्त में
एक अच्छी जगह है
अफ़सोस मगर
पहुँच से बाहर है
और दरवाज़े के बाहर
लाशें यहाँ-वहाँ पड़ी हैं
मरियल शरीरों का मजमा है
बीमारों की भारी भीड़ है
और है संस्कृति का उधार लिया
फटा ढोल बजाते
रक्षकों-भक्षकों दंगाइयों का जुलूस
जिनकी पहुँच ओबामा तक फैली है
और जिनकी सोच ओसामा से मिलती है

गुलाबी कपड़ा
उन्हें कुछ याद दिलाने की
एक खीजी हुई
कोशिश हो सकती है

 

[2009]

Author: anileklavya

मैं सांगणिक भाषाविज्ञान (Computational Linguistics) में एक शोधकर्ता हूँ। इसके अलावा मैं पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, और कुछ लिखने की कोशिश भी करता हूँ। हाल ही मैं मैने ज़ेडनेट का हिन्दी संस्करण (http://www.zmag.org/hindi) भी शुरू किया है। एक छोटी सी शुरुआत है। उम्मीद करता हूँ और लोग भी इसमें भाग लेंगे और ज़ेडनेट/ज़ेडमैग के सर्वोत्तम लेखों का हिन्दी (जो कि अपने दूसरे रूप उर्दू के साथ करोड़ों लोगों की भाषा है) में अनुवाद किया जा सकेगा।

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