मरने के बाद

मरने के बाद क्या होना?
होना क्या? कुछ नहीं होना।
मतलब रोना-धोना नहीं होना
धोना तो बिल्कुल नहीं होना
भीड़ लगना नहीं होना
किसी को बुलाना नहीं होना
कोई खबर फैलाना नहीं होना
कोई सभा-भाषण नहीं होना
कोई पंडित-वंडित नहीं होना
कोई लकड़ी-घी नहीं होना
कोई नाम-वाम, सत्य-असत्य नहीं होना
कोई परेड-जुलूस नहीं होना
बस ऐसे-का-ऐसे गाड़ी में डालना
और सीधे जा के बिजली से जला देना
कोई तीन-दस-तेरह नहीं होना
कोई फूल-वूल नदी-वदी नहीं होना
राख को कहीं कूड़े में फेंक देना होना
और कुछ किसी हालत में नहीं होना

 

[2009]

Author: anileklavya

मैं सांगणिक भाषाविज्ञान (Computational Linguistics) में एक शोधकर्ता हूँ। इसके अलावा मैं पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, पढ़ता हूँ, और कुछ लिखने की कोशिश भी करता हूँ। हाल ही मैं मैने ज़ेडनेट का हिन्दी संस्करण (http://www.zmag.org/hindi) भी शुरू किया है। एक छोटी सी शुरुआत है। उम्मीद करता हूँ और लोग भी इसमें भाग लेंगे और ज़ेडनेट/ज़ेडमैग के सर्वोत्तम लेखों का हिन्दी (जो कि अपने दूसरे रूप उर्दू के साथ करोड़ों लोगों की भाषा है) में अनुवाद किया जा सकेगा।

2 thoughts on “मरने के बाद”

  1. Lovely poem. This is true that …….

    कोई मरे या जिए
    जिन्दगी तो यूँ ही चलती रहती है
    बस रह जाती है याद
    जिंदगी भर रुलाने को

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