गलबे का मालिक

मलबे का नहीं, गलबे का

गैजेटियर सुने हैं ना?

नहीं गैज़ेटियर नहीं भाई

गैजेटियर की बात हो रही है

अच्छा गैजेट तो सुने ही होंगे

वो सरकारी वाला नहीं

नेमड अंटटी वाला भी नहीं

वो फुनवा वाला गैजेट

अउर कैमरा वाला गैजेट

लेपटपवा वाला भी तो

वही सब गैजेट बतिया रहे हैं

अइसा है की हमरे पास जो है

इन सब की भरमार है घर में

इनमें ज्यादातर जो है हमरे पास

ऊ सब तो मलबा गया है जो है

मार पइसा डूब गइल ई सब में

बात कुछ अईसी ठहरी है कि भैया

कुछ जन हम से दुसमनी समझ लिए हैं

अब काहे समझ लिए हैं ई न मालूम

तो हम तो जो है कंगाली पे खड़े हैं हियाँ

गैजेट का मलबा हमरे पास जमा ही जमा है

हम इसको गलबे का नाम दिए हैं जो है

काहे की हम किसी जनम में इक ठो

उपनियास पढ़े रहे ऊ मोहन रकेसवा का

उही से हमरे दिमाग का बलब जल पड़ा

अउर एको बात है, आपसे ही बतिया रहे हैं

किसी भी और से नहीं बतइबे का, समझे?

एगो दौर माँ हमहु को गैजेट का सौक रहा

काहे की हम रहे मार गरीब तभ भी कंगाल

अउर ऊ रजिबवा देस को इकअईसीं सदी

में जो है ले जाब का बात करी गलोबवा माँ

ऊ बात अब आप जानत हैं तमाम बढ़िया गई है दुनिया माँ

कऊ बचा हब ई बाढ़ से तो हमको तो नहीं दिखता नहीं बा

दिल्ली में इंतजाम जो हब ऊ तो सभी कुछ गजटियाव का

पेट पर पट्टी बाँध कर ठान लिया है सुना कनुनवा के साथ

चुनाव-उनाव भी ऊ सब तमाम गजटिया दिए है ई सुना है

गजट से परेसानी है तो कौनो कोना पकड़ लो और राम भजो

अऊर कोई आपसन नहीं है काहे के अब दुनिया गलोब बा

तो जो है हमहुँ बह गए ऊ धार में उस बखत

माने रजिबवा के बखत जब हम पढ़त रहे

हम भी तो अंजीनियर रहे ना आखिर तो

चाहे सौक असल सौक हमारा तो जानत हैं

उही सब लिखबा पढ़ी करे का रकेसवा माफिक

तो अब जो है हम अपने को गलबे का मालिक समझबा करी

बहुत जोर ताले में बंद कर के रखी हम अपना अनमोल गलबा

पर जो दुसमनी बना लिए हैं और हमारे गलबे के जिम्मेदार हैं

ऊ सब के मन में हमरी कंगाली से अब भी जो है ठंड न पड़ी

मतलब ये की आए दिन नया खेल होवत है परेसान करी को

अब कोई हम के बताय सकत है की ई सब दुसमनी काहे है

तो भइया आगे आव और हमें कुछ समझाव की ई मामला

है क्या आखिर? क्या हम किसी का कुछ बिगाड़ दिए हैं

तो साफ साफ बताव सायद कुछ नतीजा लिकलबा करे

तब सायद उनके दिल में ठंडक पड़े अउर हमरे दिल में भी

तनिक जो विदवान लोग ठहरे ऊ ही से बिनती है

इस मामले का कुछ खुलासा होय दोनों तरफ से

नहीं तो भैया हम तो इसको ज्यादती समझत हैं

अउर आप लोग तो हम सुने हैं सबहुँ तरह की

ज्यादती के खिलाफ हमेला संघरस करत बा

हमरी गिनती नहीं है क्या आपके दरबार मे?

हैलो, हाँ बताइबा …